Tuesday, January 9, 2024

इरादा

 इरादा


एक इरादा जल उठा तो

सौ रास्ते जगमग हुए

एक संकल्प की गूंज से

द्वार सौ खुलने लगे 


काँटों का बस ना चला

लहुलुहान होकर भी पग चले

बिजलियों की छाँव में भी

परिंदों ने पर फैला दीये 


खिच गई तलवार जब

दुश्मनों के सर झुके

अंगार आँखों में सजा तो

संकट पीछे हटने लगे


एक इरादा जल उठा तो

सौ रास्ते जगमग हुए


होने का घायल गम ना था

जुनून किसी तर कम ना था

मैदान में उतरे थे यूँ

के लौटना अब मुमकिन ना था


एक इरादा जल उठा तो

सौ रास्ते जगमग हुए


डूब कर उबरे थे वो

हो कर के भस्म निखरे थे वो

ऊँचाई आसमान की थी बहुत

पा हौसले कमतर ना थे


जब बाजूएँ थकने लगीं 

आँधी साँसों की थमने लगी

हुंकार भर संकल्प की

हर बार वो जीवंत हुए


एक इरादा जल उठा तो

सौ रास्ते जगमग हुए


इंसान को डरा सकते हो तुम

ख़ुदा को समझा सकते हो तुम

संकल्प गर जो बंध गया तो

उसको हिला सकते नहीं!!

अपने अपने राम


कोई अकेला जूझे पथ पर

कोई साथ करें संग्राम

अपनी अपनी सोच सभी की

आअपने अपने राम


कोई चूमता चरण राह के(journey vs destination)

गंतव्य किसी का धाम

हिरन गति का कोई उपासक

कोई उड़ता चील समान


अपनी अपनी सोच सभी की

अपने अपने राम


कोई भोर से करे मित्रता 

कोई संध्या में पावे श्याम

कोई खेल सा इसको खेले

कोई निपटावे काम 

अपनी अपनी सोच सभी की

अपने अपने राम


कोई हराकर ख़ुद को जीते

कोई करे जगत संग्राम

कड़े नियम का कोई तपस्वी

कोई बहता पवन समान

अपनी अपनी सोच सभी की

अपने अपने राम


जैसी जिसकी जीवन शैली 

उसके वैसे परिणाम

अपनी अपनी सोच सभी की

अपने अपने रामडे