जीवन के वेग को
थोड़ा तो लगाम दे
चख तो ले वो चार पल
जो लिखे हैं तेरे नाम पे
ये भी करूं वो भी करूं,
यहां जाऊं वहां भी जाऊं मैं
बुनता है मन ये जाल यूं
इस जाल को पहचान ले
ध्यान उन पर ले के आ
जिन पलों में तू जी रहा
तेरे हिस्से आये जो
हैं जो तेरे सामने
इन्दिरियॉ समेट कर
अन्तरमन पे ध्यान कर
भागते इस रथ को तू
थोड़ा तो विर्ष्राम दे
उलझनों के कारवां
चलेंगे हमेशा यहां
उतर के उनकी पीठ से
चिन्ताओं को विराम दे
स्वाद नजारों का ले
दोस्तों यारों का ले
जिस कल में तू जी रहा
वहां ये मिलें या ना मिलें
कदमों की ताल सुन जरा
धड़कनों का हाल सुन जरा
जो लहू बदन में बह रहा
उस की चाल सुन जरा
जिस धरती पे तेरे पांव हैं
जिस आकाश की तुझ पे छांव है
जो हवायें तुझे सींचती
जिस जल से है काया बनी
बोध कर उनका जरा
मस्तक वहां अपना झुका
वो जो रहते तेरे साथ हैं
फूंकें तुझ में प्राण हैं
सूरज का और चाँद का
सितारों भरी सांझ का
फिर नजारा कर जरा
उन्हें सांसों में तू भर जरा
जीवन के इस वन में तू
खुद को खो के देख ले
इन पेड़ पौधौं के जैसा
हो के जरा देख ले
आज में जो जी रहे
घूंट अभी का पी रहे
झूमते हवाओं में
महकती फिजाओं में
जिस की गोद में है खेलता
तू अंश है उस प्रकृति का
रुक कर उसे प्रणाम कर
खुद की तू पहचान कर
जीवन के वेग को
थोड़ी तो लगाम दे
चख तो ले वो चार पल
जो लिखे हैं तेरे नाम पे