फिर आज तुमहारी chhtई की हम आस लगा कर बैठे थे
तुमको जाने क्यूँ खबर नहीं, हुमको जाने क्यू सबर नहीं
रात कटी तारे गिन गिन, बीट गया दिन तेरे बिन
ढलते सूरज के रात को हम जंजीर से बँधे बैठे थे
दुख़्ते दिल का उप्हास ना कर, थकती साँसों पर वार ना कर
बंजर से आँचल में तेरी तस्वीर संवारे बैठे थे
क्या बुझ गयीं सब रातें वो, क्या भूल गया सब बातों वो,
कंधे पर तेरा सर रख कर, जब रोज कहानी कहते थे
एक दिन ऐसा आ जाए गर, खुद को तू अकेला पाए अगर
रच लेना मान में तस्वीर ये तू, के हम साथ तुम्हारे बैठे थे
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