मैंने धड़कनों की अशरफ़ीयान तुझ पर सभी निसार कीं
बदले में तूने प्यास की घूटें गले उतार दीं
मेने हसरतों की बस्तियाँ तेरे आँगन में संवारी मगर
तेरी बेरुख़ी की आँधियों ने वो बस्तियाँ उजाड़ दीं
मेने चाहतों की वादियों से तुझको पुकारा दम ब दम
तेरी ख़ामोशियान की गूंज में मेरी आवाज़ ना सुनाई दी
माना के हाकिम एक है, जो तेरा भी हैं मेरा भी है
पर बाँटेने में दर्द ए दिल, उसने भी बेवफ़ाई की
ढूँढता था पनाह, दहकते हुए शोलों से दिल
हाँ आगजन की राह तकने की भी नौबत आई थी
मेरे बेवफ़ा सनम ने मुझे मुड़ के भी देखा ना कभी
पर बेजारी की ये आदतें हम ने औरों पर आज़मायी थीं
किसकी इबादत हम करें , कैसे करें ये फ़ैसला
जिसकी धड़कनों में हम बसे या जिस पे धड़कनें लुटाई थीं
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