Tuesday, December 13, 2022

धड़कन


मैंने धड़कनों की अशरफ़ीयान तुझ पर सभी निसार कीं

बदले में तूने प्यास की घूटें गले उतार दीं


मेने हसरतों की बस्तियाँ तेरे आँगन में संवारी मगर

तेरी बेरुख़ी की आँधियों ने वो बस्तियाँ उजाड़ दीं


मेने चाहतों की वादियों से तुझको पुकारा दम  दम

तेरी ख़ामोशियान की गूंज में मेरी आवाज़ ना सुनाई दी


माना के हाकिम एक हैजो तेरा भी हैं मेरा भी है

पर बाँटेने में दर्द  दिलउसने भी बेवफ़ाई की


ढूँढता था पनाहदहकते हुए शोलों से दिल

हाँ आगजन की राह तकने की भी नौबत आई थी


मेरे बेवफ़ा सनम ने मुझे मुड़ के भी देखा ना कभी

पर बेजारी की ये आदतें हम ने औरों पर आज़मायी थीं


किसकी इबादत हम करें , कैसे करें ये फ़ैसला

जिसकी धड़कनों में हम बसे या जिस पे धड़कनें लुटाई थीं

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