Tuesday, December 13, 2022

विरोधाभास


हर शक्स यहां खुश रहने के लिये परेशान है

खुशियां मगर ढूंढ़ती एक खुश्नुमां इन्सान हैं


हर मुसाफिर मन्जिलों की फिराक में भटका हुआ

मन्जिलें पर थक गईं मुसाफिरों के इंतजार में


हर दुआ पूरी करे ये है खुदा की आरजू

लाखों दुआऐं पर उड़ती फिरें खुदाई की तलाश में


हर चिराग अंधेरों से लड़ने को बेताब पर

रातें अंधेरी मायूस हैं रौशनी के इंतजार में


नेकियां करने की हसरत हर इंसां के सीने मैं मगर

तलाश रीं नजरें मगर नेकियां इस जहान मैं


हुनर देखो ढ़ूढ़ता के कद्र कोई उस्की करे

हर इंसां मगर मसरूफ है हुनर की तलाश में


आशिक देखो मुहब्बतें ढ़ूढ़ता दर दर फिरे 

मुहब्बतें पर सिसक रहीं आशिकों के इंतजार में


एक दूसरे से मिलने को दोनों सिरे बेताब पर

मिल सके ना किस तरह जिन्दगी की धूप छांव में

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