देखो कैसी आग में
धधक रहा ये आसमां
क्षितिज पे देखो छाई है
कैसी अद्भभुद लालिमा
सूर्य देव सोने चले
व्याकुल चारों दिशायें हैं
प्रेम की ज्वालायें जैसे
उठती अकस्मात हैं
सूर्यास्त का आँचल कैसे
छुपाए इस प्रेम वेग को
सूर्य और दिशाओं के
इस ज्वलंत संयोग को
अंगारों की तूलिका
ने अम्बर को सजा दिया
ज्वालामुखी से रोश में
आकाश को नहला दिया
लाल, पीले, नारंगी रंग की
हुई हैं बादलों पे बारिशें अभी
प्रेम की कड़कती बिजलियों ने
रंग दी हैं दिशायें सभी
फलक पे रची इस लीला को
कोई मिटा ना पायेगा
जबतक सूर्य देव ना सो जायेंगे
जबतक सूर्यास्त ना हो जायेगा
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