Tuesday, December 13, 2022

सूर्यास्त

 देखो कैसी आग में 

धधक रहा ये आसमां

क्षितिज पे देखो छाई है

कैसी अद्भभुद लालिमा


सूर्य देव सोने चले

व्याकुल चारों दिशायें हैं

प्रेम की ज्वालायें जैसे

उठती अकस्मात हैं


सूर्यास्त का आँचल कैसे

छुपाए इस प्रेम वेग को

सूर्य और दिशाओं के

इस ज्वलंत संयोग को


अंगारों की तूलिका

ने अम्बर को सजा दिया

ज्वालामुखी से रोश में

आकाश को नहला दिया


लालपीलेनारंगी रंग की

हुई हैं बादलों पे बारिशें अभी

प्रेम की कड़कती बिजलियों ने 

रंग दी हैं दिशायें सभी


फलक पे रची इस लीला को

कोई मिटा ना पायेगा

जबतक सूर्य देव ना सो जायेंगे

जबतक सूर्यास्त ना हो जायेगा


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