Saturday, April 25, 2026

दिल


है बड़ा कम्बख़्त ये

बहकता बेवक्त ये

धड़कनों की ताल पर

थिरकता हर वक़्त ये


वासनाओं का नीड ये

बेताबियों की भीड़ ये

तीर ये छिटका हुआ

राहगीर भटका हुआ


चाहतों हैं बेपनाह 

डूँढता अगला गुनाह

ख्वाहिशों की देग है

भरा हुआ ये मेघ है


सृष्टि के जलते हवन 

में फूँकी हुई ये आग है

अनंत तक सुलगती रहें

सामिग्री इच्छायें हैं


चतुर भी है चट भी

रचता है प्रपंच भी

कम्बख़्त की क्या पूछिये

तुम्हारा हमारा दिल है ये

चिड़िया की मुस्कुराहट

 

पेड़ की टहनी पर एक चिड़िया चहचहा रही थी 

या अपनी भाषा में शायद गाना गा रही थी


या कहो अपने तरिके से

मुस्कुरा रही थी


पास से गुजरा मैं तो सकपका के उड़ गई

ढूँढता रहा मैं के जाने कहाँ गई


घोंसला रहा होगा यहीं कहीं आस पास

जिसमें दो चार चूज़ों का शायद होगा निवास


डर गई होगी मेरी बेढंगी सी चाल से

छुपाने गई होगी बच्चों को खतरे की आँच से


या हो सकता है के खाना बटोरने गई हो

गाने में किसी स्वादिष्ट कीड़े का ज़िक्र आ गया हो


बस इतना ही तो होता है चिड़िया का जीवन

थोड़ा गा कर, या खा कर, या बच्चों को खिला कर…

जिसका करती है यापन


सोचने लगा के मुझ पर भी कौन से हैं बड़े काम

में भी यही कर लूँ  इन्हीं में है आराम 


थोड़ा गा कर, खा कर, खिलाकर

और मुस्कुरा कर, मैं भी करूँ विश्राम


क्यूंकि मुझे तो प्रभु ने दिया है एक और सम्मान

चेहरे को दिया है मुस्कुराने का सामान

सुख

 

जैसे जैसे उम्र ढलती

सुख की परिभाषा बदलती

वेग सूर्य का ज्यूँ उतरता

रूप साँझ का और निखरता 


जो सुख होड़ लगाने में था 

वो अब साथ निभाने में है

शिखरों को जो पाने में था

औरों को ले जाने में है


काल चक्र का पहिया चलता

जग की महिमा धूमिल करता

मन में नया विमर्श उभरता

सुख दुख का भी राग बदलता


पहले दूर जाने में खुश थे 

अब वापस आने में खुश है

पहले रास रचाने में ख़ुश थे 

अब ठहर जाने में ख़ुश हैं


जीत के जग को बहुत सुख पाया 

गौरव यश भी खूब कमाया

पर अब थोड़ा सा रूक कर 

प्रियजन साथ बैठ पाने में सुख है


मूसी हुई सी जीन्स पुरानी 

कॉलेज जाते जाते बेटा छोड़ गया था

उसे उठा कर, तह लगा कर

अलमारी में रख पाने में सुख है


चार पौधे बिटिया के कमरे में

जिन्हें लाड प्यार से लेकर आई

अब उनका बच्चजों जैसे 

ध्यान रख पाने में सुख है


नई गाड़ियाँ नए घर 

नए तजुर्बे सब देखे भोगे

पुराने दोस्तों के साथ मगर अब

यादें पसराने में सुख है


नए नुमाइश और नया रंगढंग

नई कहानी सुन ली सब पर

वेद पुराण की कथा कहानी

सुन ने सुनाने में अब सुख है


पहले सब को समझाते थे हम

अपना पहलू बतलाते थे हम

पर कहाँ केसी किसी का परिपेक्ष बदला

सो अब चुप रह जाने में सुख हैं


जैसे जैसे उम्र ढलती

सुख की परिभाषा बदलती

वेग सूर्य का ज्यूँ उतरता

रूप साँझ का और निखरता 


अतुल 

April 2026