Saturday, April 19, 2025

चिड़िया की मुस्कुराहट

 

पेड़ की टहनी पर एक चिड़िया चहचहा रही थी 

या अपनी भाषा में शायद गाना गा रही थी


या कहो अपने तरिके से

मुस्कुरा रही थी


पास से गुजरा मैं तो सकपका के उड़ गई

ढूँढता रहा मैं के जाने कहाँ गई


घोंसला रहा होगा यहीं कहीं आस पास

जिसमें दो चार चूज़ों का शायद होगा निवास


डर गई होगी मेरी बेढंगी सी चाल से

छुपाने गई होगी बच्चों को खतरे की आँच से


या हो सकता है के खाना बटोरने गई हो

गाने में किसी स्वादिष्ट कीड़े का ज़िक्र आ गया हो


बस इतना ही तो होता है चिड़िया का जीवन

थोड़ा गा कर, या खा कर, या बच्चों को खिला कर…

जिसका करती है यापन


सोचने लगा के मुझ पर भी कौन से हैं बड़े काम

में भी यही कर लूँ  इन्हीं में है आराम 


थोड़ा गा कर, खा कर, खिलाकर

और मुस्कुरा कर

में भी करूँ विश्राम


क्यूंकि मुझे तो प्रभु ने दिया है एक और सम्मान

चेहरे को दिया है मुस्कुराने का सामान

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