मज़हबी सूरमाओं का ये ऐलान है
के ये टूटा हुआ आसमान हैं
वो जिस टुकड़े के साये में तुम पले थे
वो किसी और की दुकान है
सियासती हुक्मरानों का ये पैग़ाम है
के ये टूटा हुआ आसमान है
परंदे भले आज़ाद हों उड़ान भरने को
मगर तू तो महज़ इंसान है
तेरे लिये तो ये
टूटा हुआ आसमान है
किसे फ़ुरसत है तुझे नेकियों में तोलने की
ख़ुदा पर और बहुतेरे काम हैं
बस जो मोहर लगी है पट्टों पर
वही तेरी पहचान है
मज़हब ही नहीं, तेरी जन्नतें भी अलग हैं
कुछ इस आसमान में कुछ उस आसमान में
तेरा भाईचारे का पैग़ाम बड़ा थोथा है
तूने कायनात को तोड़ने का किया काम है
देख जरा गौर से
कितना टूटा हुआ तेरा ये आसमान है
ज़मीनों, पहाड़ों को नदियों को तू ने काट दिया
सागरों और आसमानो तक को तू ने बाँट दिया
फिर भी तुझे माफ़ कर देता में
पर तुझ पर दिलों को बाँटने का इल्ज़ाम है
तूने ही तोड़ा है इसे
जो ये टूटा हुआ आसमान है
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