Friday, October 20, 2023

सिरे

 अतुल सिंह

सौ सौ सिरे हैं ज़िंदगी के

पकड़ा एक तो छूटे दो

एक घड़ा सुख का भरा तो

मुसीबतों के फूटे दो


एक घर का सिराएक नौकरी का

प्यार का एक., एक दोस्ती का

पैसे का एकएक समाज का

एक खयालों काएक एहसास का


इसे पकड़ा तो वो फिसल गया

उसे सम्भाला तो ये निकल गया

घर परिवारहारीबीमारी

यारनौकरीपैसायारी 


कुछ आये पकड़ में कुछ छूटते हैं

कुछ तो जैसे रूठते हैं

इतना मनाओ तो हाथ आते हैं

और ध्यान बटा तो फिर फिसल जाते हैं


ऐसा ही है पैसों का सिरा

बहुत मिन्नतें करवाता है

जीवन भर परिश्रम करो 

फिर भी कहाँ हाथ आता है


दोस्ती का सिरा और प्यार का

उलझ गया एहसासों में

ढूँढो तो मिल जाएगा

लेकिन अगर टूट जायेतो फिर नहीं हाथ आयेगा


और हाथ भी कमबकथ हैं सिर्फ़ दो 

और मिनटें सिर्फ़ चार

सब सिरों को पकड़ते संभलते

ज़िंदगी का सिरातो आख़िर फिसल ही जाता है!!

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