Friday, October 20, 2023

सच और झूट

अतुल सिंह

समझौता कर के मत चलियो

बात मेरी तू मान ले

सच की गागर को मत तजियो

गाँठ हृदय में बांध ले


पाखंड झूट का बड़ा सबल

आडंबर उसका है हसीन 

उसके चुंगल में मत फँसियो

उस छलिया को पहचान ले


जहां झूठ झूम कर चलता हो

और सच कौने में काँपे थर थर

ऐसे जग में तू मत बसियो

मन में तू ये ठान ले


दुनिया का सच और तेरा सच

कई बार सिरों को खींचेगा 

अपने सच से तू मत हटियो

संकल्प तू मन में आज ले 


हो नर्म झूट और सक्थ हो सच

हो मीठा झूट पर कड़वा सच

सच की डगरी से मत हटिओ

इतना तू बस जान ले


तुझे झूट बताया झूठों ने

कुछ मूर्खों ने कुछ धूर्तों ने

उनके जैसा तू मत बनियो

इतनी बस तू ठान ले


नई फसल तो है कोमल

सच को ही सुन कर पनपेगी

सच ही इसको रास आएगा

करतव्य तू अपना जान ले


ग़र झूट उड़ेला रगों में उनकी

उसी अंधकार में जियेंगे वो

जिस से अब तक तू जूझा है

इतना तू बस जान ले


ये श्राप तू उस मर मत कसियो

ये पाप कभी तू मत करियो

समझौता कर के मत चलियो

बात मेरी तू मान ले

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