Sunday, November 3, 2013

तन्हाई

तन्हाई

जिस तन्हाई से तुम लड़ते हो
उसका नाता हम से भी है;
जो अकेलापन तुम्हे हराता है
वो हुम्हारे साथ भी साए की तरह फिरता है

जिन मजबूरीओं ने तुम्हारे हाथों को बाँधा है
वो हुमारी बेड़ियों से कुछ अलग नहीं है
जिस आह में तुम्हारी खुशियाँ डूबी थी
उसकी गहराइयों को हम भी टटोलते हैं

जिस मायूसी के समंदर में तुम्हारे सपने डूबे थे
वहाँ हम्नए भी कई ख्वाब दफ़न किए हैं
जिस ज़िंदगी की मूरत से तुम जवाब माँगते हो
उसके कदमो में हमारे सूखे आँसुयों के भी कुछ दाग हैं शायद

जाने अंजाने कोई खुशी  जब तितली की तरह पंख मार कर सामने आती है
तो उससे पकड़ कर बस रख लेने को जी चाहता है
लेकिन खुशी  का दम, तितली की तरह, बहुत नाज़ुक होता है शायद
और गम तो पुराने अख़बार की तरह..बोरी में भरते चलो बस

शायद इसी लिए तुम्हे पुकारा  था हमने
लगा था जैसे तुमसे पहचान पुरानी है
फिर उस तितली की तरह, जिसके पंखों को च्छुने से दर गये थे हम

इस एहसास को भी हमने जाने दियातुमको जाने दिया

1 comment:

  1. कभी उस अहसास को अहसास की तरह महसूस कर के देखो...हो सकता है उसके तले ही जीवन है और कभी जाने देने की नौबत ही न अाए ...क्योंकि तब वो तुम्हारी ख़ुशी एेसी है जो जा के भी तुम्हारी ही है !

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