Saturday, May 14, 2022

चाय का किनारा

For any चाय lovers… chini jyada ya kum ho to maaf kijiyega



चलो चाय के किनारे चलते हैं

अदरक इलाइची की महक

दोस्तों की छाँव

वहीं

बैठेंगे आराम से


दो चार चुस्क़ीयों के बाद

खुलने लगेंगे दिलों के ताले

कुछ तुम अंधेरो को बाहर धकेलना

कुछ हम रोशनियों को

भीतर बुलाएँगे


कुरेदेंगे माज़ी की रेत

दोनो हथेलीयों के बीच 

प्याला पकड़ कर

टटोलेंगे सीपीयाँ 

यादों की 


और जब बातों का सूरज 

ढलने लगेगा 

तो एक और प्याला 

ले बैठेंगे

और बिछाएँगे बातों की नयी बिसात


शाम ही तो है

उतर जाएगी 

प्यालों 

की

गहराइयों में

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