For any चाय lovers… chini jyada ya kum ho to maaf kijiyega
चलो चाय के किनारे चलते हैं
अदरक इलाइची की महक
दोस्तों की छाँव
वहीं
बैठेंगे आराम से
दो चार चुस्क़ीयों के बाद
खुलने लगेंगे दिलों के ताले
कुछ तुम अंधेरो को बाहर धकेलना
कुछ हम रोशनियों को
भीतर बुलाएँगे
कुरेदेंगे माज़ी की रेत
दोनो हथेलीयों के बीच
प्याला पकड़ कर
टटोलेंगे सीपीयाँ
यादों की
और जब बातों का सूरज
ढलने लगेगा
तो एक और प्याला
ले बैठेंगे
और बिछाएँगे बातों की नयी बिसात
शाम ही तो है
उतर जाएगी
प्यालों
की
गहराइयों में
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