जिस कल का इंतज़ार में बैठे हो तुम तुम्हें जीने के लिए
वो आज के लिबास आता है रोज़ मिलने के लिए
इर्द गिर्द भटक रहा मन में वो ये प्यास लिए
कदर कोई उसकी भी “कल” के जैसी ही करे
कल आएगा तो इस तरह आसमान उठा लेंगे हम
दोस्तों से कितना प्यार है कल उन्हें बता देंगे हम
माँ बाप से मिलने भी कल चले जाएँगे
बच्चों को हम कल गले लगाएँगे
कल से चलो थोड़े और पैसे बचा लेंगे हम
दो चार दंड बैठक भी कल लगा लेंगे हम
अच्छी सी दो चार किताबें भी कल ले आएँगे
ज़िंदगी को नए तरीक़े से कल हम सजाएँगे
कल अपनी ज़िंदगी की सारी भड़ास मिटा देंगे हम
सारी बुरी आदतें भी कल मिटा देंगे हम
कुछ एक नये शौक़ भी कल से हम सजाएँगे
यार की मदद करने भी कल हम ज़रूर जाएँगे
ज़िंदगी एक जश्न की तरह कल हम मनाएँगे
जो उम्र भर ना कर सके वो कल करके दिखाएँगे
कल के बहाने आज से बच के निकल जाएँगे
अपनी ही आखों में अपनी इज़्ज़त हम बचाएँगे
क्यूँकि कल तो कभी आता नहीं
आज कभी जाता नहीं
सदियों से आज़माया हुआ
ये तरीक़ा हम अपनाएँगे
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