मरते तो सब हैं लेकिन
हमें उनकी झूटी क़समों ने मारा
हमारे हुज़ूर की
ज़र्रा नवाज़ी तो देखिए
दिल तोड़ के कहते हैं
के कुछ ज़्यादा ही नाज़ुक था तुम्हारा
उनके जुल्म की ये
बदमिज़ाजी तो देखिए
वो कहते हैं के मुहब्बत
हमसे है और ग़ैरों से भी
उनकी बातों की
लापरवाही तो देखिए
जब टूट गईं लहरें साहिल पे
तब पूछा उन्होंने हमारा हाल
इस मुलाक़ात की
बेक़रारी तो देखिए
कहते हैं मुहब्बत की है
जुर्म नहीं
परवर दिगार की
नादानी तो देखिए
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