Monday, May 16, 2022

दिलफेंक

 


ज़रा दिल सम्भल के दिया करो

ज़रा दिल सम्भल के लिया करो

ये बेवफ़ाओं का शहर है

ज़रा फ़ासले से जिया करो


और दे दिया ग़र दिल 

तो वापस आएगा ज़रू

उसकी मरम्मत की तय्यारी भी

अभी से किया करो


कोई खनरोचेगा भर उसे 

कोई टुकड़े कर के देगा 

अपने माल की हिफ़ाज़त 

मियाँ खुद ही किया करो


कहते हो नाज़ुक है बड़ा

पर उछालते हो गेंद सा 

फिसल जाएगा किसी हाथ से

ख़ौफ़ खुदा का किया करो 


सौपने को ग़ैरों को इसे 

छाया है क्या फ़ितूर

नियामत खुदाँ की है ये 

हिफ़ाज़त इसकी किया   करो


दिल कितनो पे लुटाया

इस पर करते हो क्या ग़ुरूर

जीत सको ग़र किसी का

तो मानेंगे तुमहें हुजूर

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