ज़रा दिल सम्भल के दिया करो
ज़रा दिल सम्भल के लिया करो
ये बेवफ़ाओं का शहर है
ज़रा फ़ासले से जिया करो
और दे दिया ग़र दिल
तो वापस आएगा ज़रू
उसकी मरम्मत की तय्यारी भी
अभी से किया करो
कोई खनरोचेगा भर उसे
कोई टुकड़े कर के देगा
अपने माल की हिफ़ाज़त
मियाँ खुद ही किया करो
कहते हो नाज़ुक है बड़ा
पर उछालते हो गेंद सा
फिसल जाएगा किसी हाथ से
ख़ौफ़ खुदा का किया करो
सौपने को ग़ैरों को इसे
छाया है क्या फ़ितूर
नियामत खुदाँ की है ये
हिफ़ाज़त इसकी किया ल करो
दिल कितनो पे लुटाया
इस पर करते हो क्या ग़ुरूर
जीत सको ग़र किसी का
तो मानेंगे तुमहें हुजूर
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