Monday, May 16, 2022

यारी


दोस्ती हवाओं से की

फूलों से आशिक़ी

सोया चाँदनी के साथ

गुफ़्तगू फ़िज़ाओं से की


आजदीययों  के चमन में

सींची मैंने ज़िंदगी

बेफ़िकर आसमानों ने 

दिल को मेरे पनाह दी


इस मोड़ पर कुछ दोस्त मिले

उस मोड़ पर मुहब्बत मिली

यूँ वक्त के करवांन पर

ज़िंदगी बढ़ती गयी


ना ढूंढता मंजिल कोई

ना ज़रूरत किसी मक़ाम की

राहों में ही खिल रही

मेरी ज़िंदगी की हर ख़ुशी

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