Monday, May 16, 2022

क़ुसूर



जब यूँ ही अकेला होता हूँ 

दिल करता ये क़ुसूर है

झोंका तेरी यादों का

लाता तो ज़रूर है


लहरों की नटखट चंचलता 

तेरी हंसीयों में छनती थी

उगते सूरज की लाली भी

तेरे गालों पर सजती थी


तेरी आँखों की मदिरा

मेरे दिल पल छलकी है

ख़ुशबू तेरे काँधे की

मेरे तन से लिपटी है


पी कर यादों की प्याली को

छाया यूँ सरूर है

कहने को ये बात तुझे

अब होता दिल मजबूर है


तेरे हाथों में हाथ रहे

दो चार क़दम हम साथ चलें

कुछ लम्हे तेरे साथ कटें

बस दिल का ये फ़ितूर है 

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