है सैलाब बन के आई तू,
मुझे डूबने से डर नहीं
तेरी आंधी में खो जाऊँगा
इसकी फ़िकर नहीं
तू जश्न है फ़ितूर है
तू है दीवानगी
भूकम्प है ऐसा
के काँपे है सर ज़मीन
कौंधती हैं दिल में बिजलियाँ,
है लहू में रवानगी
धड़कनों की ताल पर
अब जो नाचे है ज़िंदगी
डर है के थम ना जाए
बस ये तूफ़ान ना कहीं
डर है के थम ना जाए
बस ये तूफ़ान ना कहीं
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