Monday, May 16, 2022

यादें


शाम की गोदी में झूलती यादें

वक्त की चादर उधेड़ती यादें

बिखरे हुए मोती से गुजरे लम्हों को

फिर एक बार बटोरती यादें


माज़ी की वादी में गूंजती यादें

दिल के समंदर पर डोलती यादें

कुछ पूरी कुछ अधूरी सी 

कुछ याद आती कुछ भूलती यादें


बहुत याद आपगे उस ने कहा था

सुन ना पाए पर हम को नशा था

देर से समझे हम प्यार की बातें

बन के रह गयीं जो अब सिर्फ़ यादें


वक्त सौदागर है भारत है झोली

लेता है सबकी अधूरी मुरादें

प्यासी ख्वाहिशें भूकी फ़र्यादें

बदले में देता है सिर्फ़ यादें


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