शाम की गोदी में झूलती यादें
वक्त की चादर उधेड़ती यादें
बिखरे हुए मोती से गुजरे लम्हों को
फिर एक बार बटोरती यादें
माज़ी की वादी में गूंजती यादें
दिल के समंदर पर डोलती यादें
कुछ पूरी कुछ अधूरी सी
कुछ याद आती कुछ भूलती यादें
बहुत याद आपगे उस ने कहा था
सुन ना पाए पर हम को नशा था
देर से समझे हम प्यार की बातें
बन के रह गयीं जो अब सिर्फ़ यादें
वक्त सौदागर है भारत है झोली
लेता है सबकी अधूरी मुरादें
प्यासी ख्वाहिशें भूकी फ़र्यादें
बदले में देता है सिर्फ़ यादें
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