साथ रहने का वादा तो निभाया हमने
साथ रहने का सलीका मगर हम भूल गए
प्यार करने का वादा तो पूरा किया
प्यार जताने का तरीक़ा मगर हम भूल गए
तुझे सराहने का उम्र भर इरादा तो था
रोज़ सराहना तुझे मगर हम भूल गए
सौ बार तुझे हमने गले लगाया मगर
तेरे जस्बातों को गले से लगाना मगर हम भूल गए
ज़िंदगी की दौड़ में यू रास्ते बताए बहुतों को
ज़िंदगी की दौड़ में पर अपना ठिकाना भूल गए
बात ग़ैरों से तो अदब और तहज़ीब से कीu
पर अपनों को हम इज़्ज़त से भी बुलाना भूल गए
जिनकी फूंकी जान हमारी सासों में चले
उनके एहसान उन्हें याद दिलाना भूल गए
खुद के रूठने का सबब उन्हें याद रहे ना रहे
याद रहा जब हम उनको मानना भूल गए
कोई बैठा नहीं है साथ इस भरी महफ़िल में
लगता है हम आज नहाना भूल गए !!
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