Monday, May 16, 2022

बनारस



कहाँ दिल्ली बम्बई फँस गए यार

किस दलदल में हम धँस गए यार

एक नयी दिशा पकड़ते हैं

चल यार बनारस चलते हैं


जिस करम भूमि में लड़ते हम

वो हारती प्राण लता का दम 

ये विकट राग़नी तज़ते हैं

चल यार बनारस चलते हैं


माया की महिमा उतरी अब

चालित जग का सूखा रस

नयी श्वास अब भरते हैं

चल यार बनारस चलते हैं


तोड़ें अब ये काराग़ार

अंतर ध्वनि से हो संचार

कथा निराली रचते हैं

चल यार बनारस चलते हैं


नहीं बानर शहर कोई

ना है किसी मंज़िल का नाम 

ऐसी सुंदर पगडंडी वो

जहां खुद से खुद हम मिलते हैं


चल यार बानर चलते हैं

चल यार बनारस चलते हैं

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