फिर एक बार मुझ से मिल
पहले की तरह
मासूमियत से, मुहब्बत से
फिर एक बार मुझ से मिल
तेरी वो बेबाक हंसी
जिसमें तेरी खुशियां तोल्ती थी मैं
नजरों में चमकते सितारे
जिनमें खुद को ढूंढ लिया करती थी मैं
उनकी भूख अब भी बाकी है मुझे
फिर एक बार मुझ से मिल
तेरे कदमाैं के तूफान में
खुद को लपेटा करती थी
तेरे हाैसले के शोलों में
खुद भी दहका करती थी
शायद तुझे तेरी याद दिला दूंगी मैं
झुकी हुई कमर में
फाैलाद बहा दूंगी मैं
मेरे लिये ना हो अपने लिये सही
फिर एक बार मुझ से मिल
रूह हूं तेरी कोई गैर नहीं
फिर एक बार मुझ से मिल
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